शारदीय नवरात्रि पर्व: माता हरसिद्धि के नौ दिन शयन से विराम; प्रतिदिन प्रज्वलित होंगी दीपमालिकाएं

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शारदीय नवरात्रि पर्व: माता हरसिद्धि के नौ दिन शयन से विराम; प्रतिदिन प्रज्वलित होंगी दीपमालिकाएं
उज्जैन, मध्य प्रदेश 1 min read 26 Sep 2024

शारदीय नवरात्रि पर्व: माता हरसिद्धि के नौ दिन शयन से विराम; प्रतिदिन प्रज्वलित होंगी दीपमालिकाएं

हरसिद्धि मंदिर, जो देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है, में शारदीय नवरात्रि पर्व 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2024 तक मनाया जाएगा। माता हरसिद्धि शयन नहीं करेंगी, और भक्तों के लिए विशेष पूजा, अभिषेक, और दीपमालिका का आयोजन होगा।

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शारदीय नवरात्रि पर्व: माता हरसिद्धि के नौ दिन शयन से विराम; प्रतिदिन प्रज्वलित होंगी दीपमालिकाएं

देश के 52 शक्तिपीठों में से एक, हरसिद्धि मंदिर, शारदीय नवरात्रि पर्व के लिए जोर-शोर से तैयारियों में जुटा हुआ है। नवरात्रि इस पवित्र स्थान पर 3 अक्टूबर, 2024 से शुरू होकर 12 अक्टूबर, 2024 तक चलेगी। इस दौरान भक्तजन माता की आराधना में लीन रहेंगे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

 

इन नौ दिनों में हर दिन माता का अभिषेक पूजन होगा, जिसमें विशेष मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। भक्तों द्वारा माता का नित्य श्रृंगार किया जाएगा, जिससे माता की कृपा प्राप्ति की कामना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि माता हरसिद्धि नवरात्रि के दौरान शयन नहीं करती हैं, जिसके कारण मंदिर में शयन आरती का आयोजन नहीं होगा।

 

हरसिद्धि मंदिर की यह विशेषता इसे अन्य शक्तिपीठों से अलग बनाती है। यहां आने वाले भक्तों को एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। मंदिर परिसर को भक्ति और श्रद्धा के माहौल में सजाया जाएगा, और भक्तजन इस अवसर का लाभ उठाने के लिए उत्सुकता से एकत्रित होंगे।

 

इस पर्व के दौरान विशेष पाठ और जप का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि माता की कृपा सभी पर बनी रहे। श्रद्धालु हरसिद्धि के दर पर आकर अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | FAQ

महाकालेश्वर मंदिर सुबह 4:00 बजे से रात 11:00 बजे तक खुला रहता है। भस्म आरती सुबह 4:00 बजे होती है जिसके लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक है।
महाकाल लोक में 108 स्तंभ, 52 प्रतिमाएं, रुद्र सागर झील का सौंदर्यीकरण, शिव पुराण की कथाओं के दृश्य और भव्य प्रवेश द्वार देख सकते हैं।
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